नटराजसन:-
नटराज आसन भगवान शंकर का मुख्य आसन माना जाता है। शिव का एक और नाम नटराज भी है इसलिए इसे नटराज आसन कहा जाता है। इस योग मुद्रा से शरीर को संतुलित करने में मदद मिलती है। इस योग का अभ्यास खड़े होकर किया जाता है। इस योग आसन का नाम इसके आकार पर रखा गया है - नृत्य मुद्रा के देवता। इस योग आसन का उच्चारण इस प्रकार करते है नट-राज-आसन।
नट - नृत्य, राज - राजा, आसन - आसन या मुद्रा
![]() |
| नटराजसन-विधि-लाभ-Natarajasana-Dancer Pose |
नटराजसन करने की विधि:-
- सबसे पहले खड़े हो जाएं। पंजों को एक साथ रखें और आंखों की सीध में किसी बिंदु पर दृष्टि केंद्रित करें। दाएं घुटने को मोड़ें और शरीर के पीछे दाहिने हाथ से टखने को पकड़ लें।
- दोनों घुटनों को एक साथ रखते हुए संतुलन बनाये रखें।
- धीरे-धीरे दाहिने पैर को उठाते हुए पीछे की ओर तानें और जितना संभव हो ऊंचा उठायें। यह जांच ले कि दायां कुल्हा बिलकुल न मुड़े और पैर शरीर के ठीक पीछे ऊपर की ओर उठे।
- बाएं हाथ की तर्जनी के आगे वाले भाग और अंगूठे को ज्ञान मुद्रा में लाकर बाएं हाथ को शरीर के सामने ऊपर की ओर उठायें। नजरे बाएं हाथ पर केंद्रित करें।
- जितनी देर तक संभव हो इस अवस्था को बनाये रखें।
- बाएं हाथ को एक साथ रखें। फिर दाहिने टखने को छोड़ दें और पंजे को नीचे जमीन पर ले आएं।
- दाएं हाथ को नीचे कर बगल में ले आएं।
- आरम करें और फिर से बाएं पैर से आसन को दोहराऐं।
नटराजसन के लाभ:-
- कूल्हों, पीठ के निचले हिस्से, निचले पेट और गर्दन की मांसपेशियों को टोन एवं उनमें खिंचाव पैदा करता है।
- यह आसन मानसिक एकाग्रता प्रदान करता है।
- रीढ़ की हड्डी को कोमल बनाता है।
- पाचन सुधारता है।
- मन को शांत करने के लिए यह आसन बहुत फायदेमंद है।
नटराज आसन करने में सावधानियां:-
- इस आसन को करते समय अगर आपको कमर में कोई तकलीफ महसूस होती है तो आपको इस आसन को नहीं करना चाहिए।
- अगर इस आसन से आपको कंधे में दर्द, कूल्हों में दर्द या घुटनों में दर्द होता है तो इस अभ्यास को वही रोक दें।

0 Comments