स्वस्तिकासन
यह योग के प्रमुख 10 आसन में सबसे पहला आसन है। स्वस्तिक का मतलब होता है शुभ। यह ध्यान लगाने के लिए बहुत ही अच्छा आसन है। अंगे्रजी से अनुवाद किया गया काॅन्टेंट - स्वस्तिकासन हठ योग में एक प्राचीन ध्यान आसन है, जिसमें क्राॅस-लेग किया जाता है। संस्कृत में स्वस्तिक का अर्थ शुभ होता है, यह सौभाग्य के एक प्राचीन हिन्दू प्रतीक का नाम भी है। इसके लिए सबसे पहले आपकेा मैट की आवश्यकता होगी या तो एक कंबल ले सकते है। इस आसन के करने के बहुुत से फायदे हैं। सबसे पहले इसकी विधि की बात करते है कि स्वास्तिकासन को कैसे किया जाना चाहिए।
![]() |
| swastikasana-in-hindi |
स्थितिः-
स्वच्छ कम्बल या कपडे पर पैर फैलाकर बैठें।स्वस्तिकासन करने की विधिः-
- सबसे पहले जमीन पर बैठ जाइए।
- बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जंघा और पिंडली (calf, घुटने के नीचे का हिस्सा) और के बीच इस प्रकार स्थापित करें की बाएं पैर का तल छिप जाये।
- उसके बाद दाहिने पैर के पंजे और तल को बाऐं पैर के नीचे से जांघ और पिंडली के मध्य स्थापित करने से स्वस्तिकासन बन जाता है।
- ध्यान मुद्रा में बैठें तथा रीढ़ की हड्डी सीधी कर स्वास खींचकर यथाशक्ति रोकें। इसी प्रक्रिया को पैर बदलकर भी करें।
- ध्यान रखे की आपके घुटने जमीन से लगे हुए हो।
स्वस्तिकासन के लाभ:-
- पैरों का दर्द, पसीना आना दूर होता है।
- पैरों का गर्म या ठंडापन दूर होता है, ध्यान हेतु बढिया आसन है।
- स्वस्तिकासन करने से कब्ज दूर होती है और पाचन शक्ति बढती है।
- इस आसन को हर रोज करने से पसीने की बदबू भी दूर हो जाती है।
- इस आसन को करने से आपकी शारीरिक और मानसिक परेशानियां दूर हो जाएंगी।
- अगर इस आसन को सही तरीके से लगातार किया जाय तो यह कमर दर्द कम करने में मदद करता है।
- यह तन औन मन को सही संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
- वायु रोग को दूर करने में भी स्वस्तिकासन बहुत मदद करता है।
- लिंग और योनि से सम्बन्धित रोगों को दूर करने में भी बहुत ज्यादा सहायक है।
स्वस्तिकासन करते समय सवधानियाँ :-
- अगर आप को रीढ की हड्डी से सम्बन्धित कोई परेशानी है तो इस आसन को न करें।
- जिन लोगों को साइटिका की समस्या है उन लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
- इसके अलावा अगर आपके घुटनों में दर्द रहता है तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।

0 Comments