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सर्वांगासन, विधि, लाभ, सवधानियाँ

सर्वांगासन :-

        सर्वांगासन या कन्धों के सहारे एक योग आसन है, जिसमें पुरे शरीर को कन्धों पर संतुलित किया जाता है।अंग्रेजी से अनुवाद किया गया कॉन्टेंट - सर्वांगासन या कंधे की हड्डी या अधिक पूरी तरह से सलम्बा सर्वांगासन, व्यायाम के बाद आधुनिक योग म एक उल्टा आसन है, मध्ययुगीन हठ योग में इसी तरह की मुद्रा का इस्तेमाल किया गया था। 

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सर्वांगासन करने की विधि :-

  • इस आसन को शुरू करने से पहले साफ वातावरण में समतल स्थान पर दरी, चटाई या योगा मैट को बिछाकर पीठ के बल लेट जाइए।  
  • दोनों पैरों को धीरे-धीरे उठाकर 90 अंस तक लाएं।  बाँहों और कोहनियों की सहायता से शरीर के निचले भाग को इतना ऊपर ले जाएँ की वह कंधों पर सीधा खड़ा हो जाए। 
  • पीठ को हाथों का सहारा दें, हाथों के सहारे से पीठ को दबाएं।  कंठ ठुड्डी लगाकर यथाशक्ति करें। 
  • अपने पैरों की उँगलियों को आसमान की तरफ खींचिए और अपनी आँखों को पैर की उँगलियों पर केंद्रित करें। 
  • कुछ समय तक इसी स्थिति में बने रहिये और सांसो को सामान्य रखें। 
  • फिर धीरे-धीरे  पूर्व अवस्था में पहले पीठ को जमीन से टिकाएं फिर पैरों को भी धीरे-धीरे सीधा करें।
  • इस प्रक्रिया को 3 - 4 बार करें।  

सर्वांगासन करने के लाभ :-

  • मोटापा, दुर्बलता, कद वृद्धि की कमी एवं थकान आदि विकार दूर होते हैं। 
  • थायराइड को सक्रिय एवं स्वस्थ बनाता है। 
  • एड्रिनल, शुक्र ग्रंथि एवं डिम्ब ग्रंथि को सबल बनाता है। 
  • इस आसन को करने से गले में रक्त जमा होता है और रक्त ठीक तरीके से थायराइड ग्लैंड में बहता है जिससे मजबूती प्रदान करता है। 
  • यह आसन गले की समस्या को दूर करता है। 
  • अगर आपके कान, नाक और गले में कोई परेशानी हो तो यह आसन करने से ये सभी परेशानी दूर होती है। 

सर्वांगासन करते समय सवधानियाँ :-

  • सर्वांगासन करते समय लार को गटकें नहीं। 
  • अगर सर्वांगासन करते समय आपको जमाई आये, छींक या कफ आये तो अपना पैर तुरंत नीचे कर लें अन्यथा गले के नीचे, सीने और कानों में दर्द हो सकता है। 
  • प्रेग्नेंट महिलाओं  प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने बाद सर्वांगासन नहीं करना चाहिए। 
  • यदि आपको कोई कठिनाई महसूस होती है तो आप कमर के नीचे तकिये का प्रयोग कर सकते है। 
  • यदि आपकी आँखों में ग्लूकोमा की समस्या है तो सर्वांगासन करने से बचें। 

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