गोमुखासन
गोमुख का अर्थ होता है गाय का मुख अर्थात अपने शरीर को गौमुख के समान बना लेने के कारण ही इस आसन को गौमुखासन कहा जाता है। गौ शब्द का अर्थ प्रकाश भी होता है। इस आसन में जांघें और दोनों हाथ एक छोर पर पतले और दूसरे छोर पर चैडे होते है, जिसके कारण वो गाय के मुख के सामान दिखाई देते है। यह हठ योग की श्रेणी में सबसे प्रचलित आसन है। इस आसन को करने में व्यक्ति की स्थिति गाय के समान दिखाई देती है। यह आसन करने में बहुत ही सरल है। गोमुखासन महिलाओं के लिए भी बहुत लाभदायक होता है। वजन को कम करने के लिए और अपने शरीर को सुंदर बनाने के लिए यह आसन बहुत ही फायदेमंद होता है। गोमुखासन हमाने कंघों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
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गोमुखासन करने की विधिः-
- दोनों पैर सामने फैलाकर बैठें। बाएं पैर को मो़ड़कर एड़ी को दाएं नितम्ब के पास रखें।
- दायें पैर को मोड़कर बाएं पैर के ऊपर इस प्रकार रखें की दोनों घुटने एक दूसरे के ऊपर उठाकर पीठ की ओर मुड़िए तथा बाएं हाथ को पीठ के नीचे से लाकर दायें हाथ को पकड़िये।
- अब दोनों हाथों को खींच के आपस में मिलाने की कोशिश करें और पीठ के पीछे हाथों को एक दूसरे से पकड लें।
- गर्दन और कमर सीधी रहे।
- एक ओर से लगभग एक मिनट तक करने के पश्चात दूसरी ओर से इसी प्रकार करें।
गोमुखासन से होने वाले लाभ:-
- अंडकोष वृद्धि एवं आंत्र वृद्धि में विशेष लाभप्रद है ।
- धातुरोग, बहुमूत्र एवं स्त्री रोगों में लाभकारी है।
- यकृत, गुर्दे एवं वक्ष स्थल को बल देता है। संधिवात, गठिया को दूर करता है।
- लैंगिक परेशानियों को दूर करने में यह आसन बहुत ही कारगर है। यह स्त्री रोगों के लिए भी फायेदेमंद है।
- अगर आप कूल्हे के दर्द से परेशान हैं तो इस आसन का अभ्यास करें।
- यह आसन बबासीर के लिए बहुत ही उपयोगी योगाभ्यास माना जाता है।
- यह आसन छाती को खोलता है और आपके पोस्चर या सामान्य बैठने और खडे होने की मुद्रा में सुधार लाता है।
- यह पैर में ऐंठन को कम करता है और पैर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- अगर आप पीठ एवं बांहों की पेशियों को मजबूत बनाना चाहते हो तो इस आसन का अभ्यास जरूर करें।

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