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जानुशीर्षासन, विधि, लाभ, सावधानियां

जानुशीर्षासन

               जानुशीर्षासन योग की वह श्रृंखला है जिसमे व्यक्ति को विषम स्थिति में बैठ के अपने आगे की ओर झुकना होता है।  यह आसन अपने अधिकार में एक चुनौतीपूर्ण आसन है खासकर पुरुषों के लिए।  यह आसन जांघो, हैमस्ट्रिंग, कूल्हे के जोड़ों, पीठ के जोड़ों, पीठ, हाथों और कन्धों का लचीलापन बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है।  जानुशीर्षासन दिल वह दिमाग दोनों को शांत करता है और यह पुरे शरीर को भी फैलता है इसलिए इस आसन को योग श्रृंखला के अंत में किया जाता है। जानुशीर्षासन आसन अष्टांग योग की प्राथमिक श्रृंखला का हिस्सा है। 
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जानुशीर्षासन करने की विधि :-

  • पैरों को सामने की ओर सीधे फैलते हुए बैठ जाएँ रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। 
  • बाएं घुटने को मोड़ें, बाएं पैर के तलवे को दाहिने जांघ के पास रखें, बायाँ घुटना जमीन पर रहे। 
  • सांस भरें, दोनों हाथों को सिर से ऊपर उठायें, खींचे और कमर को दाहिनी तरफ घुमाएं। 
  • सांस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से आगे झुकें, रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए, ठुड्डी को पंजों की ओर बढ़ाएं। अगर सम्भव हो तो अपने पैरों के अंगूठों को पकड़ें, कोहनी को जमीन पर लगाएं, अँगुलियों को खींचते हुये आगे की ओर बढ़ें। 
  • साँस रोकें (स्थिति को बनाएं रखें)
  • सांस भरे, सांस छोड़ते हुये ऊपर उठें, हाथों को बगल से नीचे ले आएं। 
  • पूरी प्रक्रिया को दाएं पैर के साथ दोहराएं। 

जानुशीर्षासन करने से होने वाले लाभ :-

  • पीठ के निचले हिस्से का व्यायाम हो जाता है। 
  • उदर के अंगों व कन्धों का व्यायाम हो जाता है। 
  • इस आसन को करने से आपके पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है, इसके साथ यह आसन आपके पेट के छोटी और बड़ी आँतों को फैलता है।  जो पाचन क्रिया को मजबूत करता है यह आपके पेट में कब्ज की समस्या को ख़त्म कर देता है।  यह पेट फूलना और पेट की सूजन की परेशानी को भी दूर करता है।  
  • मानसिक तनाव को काम करने में लाभदायक। 
  • ग्रोइन, हैमस्ट्रिंग और कंधे को एक अच्छा खिंचाव मिलता है। 
  • यह आसन प्रजनन प्रणाली के कार्य में सुधार करता है। इस आसन को करने से प्रजनन अंग भी उत्तेजित होते है , जिसके कारण मासिक धर्म और रजोनिवृत्ति (मासिक धर्म का बंद होना) आदि समस्या ख़त्म हो जाती है। 
  • गर्भावस्था के दौरान, यह आसन पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है। लेकिन इस आसन को केवल दूसरे तिमाई तक ही किया जाना चाहिए। 
  • यह हिप्स और पुरे शरीर को फैलता है।  

जानुशीर्षासन करते समय सावधानियां :- 

  • अगर आपको घुटनों में दर्द है तो आप इस आसन को न करें। 
  • गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित व्यक्ति आसन नहीं करना चाहिए। 
  • अगर आप दस्त और अस्थमा की समस्या से परेशान है तो आप इस आसन को करने से बचें। 
  • अगर आप लंबर डिस्क हर्नियेशन (lumbar disc herniation) के रोगी है तो आप इस आसन को ना करें। 

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