पवनमुक्तासन
यह आसन पेट की वायु निकालने में मदद करता है, इस कारणवश इस आसन का नाम पवनमुक्तासन है। पवनमुक्तासन के जरिये शरीर को मजबूती मिलती है, जिसकी मदद से हार्ड वर्क करने पर थकान कम होती है। यह आसन पेट में भारीपन और कब्ज से निजात दिलाने में सहायक है।
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पवनमुक्तासन करने की विधि :-
- अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और पैरों को साथ में कर लें और हाथों को शरीर के साथ जोड़ लें।
- गहरी लम्बी साँस अंदर लें और साँस छोड़ते हुए अपने दाएं घुटने को अपनी छाती के पास ले कर आएं। जंघा को हाथों से पकड़ते हुए पेट पर दबाएं।
- दोबारा से एक लम्बी गहरी साँस लें और छोड़ते हुए अपने सर और छाती को जमीन से उठायें। अपनी ठोड़ी को अपने दाएं घुटने से लगाएं।
- आसन में रहे और लम्बी गहरी सांसे लेते रहे।
- ध्यान दें साँस छोड़ते हुए अपने घुटने को हाथों से कस कर पकड़ लें। छाती पर दबाव बनायें। साँस लेते हुए, ढीला छोड़ दें।
- साँस छोड़ते हुए, वापस जमीन पर आ जाएँ और विश्राम करें।
- यह पूरी प्रक्रिया बाएं पैर के साथ भी करें और फिर दोनों पैरों के साथ भी करें।
- चाहे तो आगे-पीछे थोड़ा झूल सकते है। दाएं-बाएं भी 4-5 बार झूल सकते हैं और उसके बाद विश्राम करें।
पवनमुक्तासन के लाभ :-
- पीठ व पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- हाथों व पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और पीठ व कूल्हे के जोड़ के हिस्से को तनाव मुक्त करता है।
- पेट एवं दूसरी इन्द्रियों की मालिश करता है।
- पेट से वायु को निकलता है और पाचन क्रिया में मदद करता है।
इस स्थिति में पवनमुक्तासन न करें।
- यही आपको उच्च रक्त-चाप, दिल की बीमारी, हर्निया, हैपेरिसिडिटी, मासिक धर्म, गर्दन या कमर की कोई भी समस्या है तो यह आसन न करें। गर्भावस्था के तीसरे महीने के बाद भी यह आसन न करें।

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