गोरक्षासन, विधि, लाभ
गोरक्षासन
गोरक्षासन करने की विधिः-
- दोनों पैरों की एडी तथा पंजे आपस में मिलाकर सामने रखिये।
- अब सीवनी नाड़ी (गुदा एवं मूत्रेन्द्रिय के मध्य) को एडियों पर रखते हुए उस पर बैठ जाइए। दोनों घुटने भूमि पर टिके हुए हों।
- हाथों को ज्ञान की स्थिति में घुटनों पर रखें।
गोरक्षासन से लाभः-
- मांसपेशियों में रक्त संचार ठीक रूप से होकर वे स्वस्थ होती है।
- मूलबंध को स्वाभाविक रूप से लगाने और ब्रह्मचर्य कायम रखने में यह आसन सहायक है।
- इन्द्रियों की चंचलता समाप्त कर मन में शान्ति प्रदान करता है। इसलिए इसका नाम गोरक्षासन है।
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