अधोमुख स्वान आसन
अधो सामने मुख - चेहरा स्वान / स्वान-कुत्ता अधोमुख स्वान आसन एक कुत्ते (स्वान) की तरह सामने की ओर झुकने का प्रतिकात्मक है इसलिए इसे अधोमुख स्वान आसन कहते हैं। अधोमुख स्वानासन को अष्टांग योग का बेहद महत्वपूर्ण आसन माना जाता है। यह आसन सूर्य नमस्कार के आसनों में से एक है।
योग की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसके आसन प्रकृति में पाई जाने वाली मुद्राओं और आकृतियों से प्रभावित होते है। योग विज्ञान ने अधोमुख स्वानासन को कुत्ते अक्सर इसी मुद्रा में शरीर की थकान मिटाने के लिए स्ट्रेचिंग करते हैं। शरीर में स्ट्रेचिंग के लिए बताए गए सर्वेश्रेष्ठ आसनों में से एक है।
अधोमुख स्वानासन मुख्य रूप से 3 शब्दों से मिलकर बना है। पहला शब्द है ‘अधोमुख‘ जिसका अर्थ होता है नीचे की तरफ मुंह करना। दूसरा शब्द है ‘स्वान‘ जिसका अर्थ कुत्ता होता है। तीसरा शब्द है ‘आसन‘ जिसका अर्थ है बैठना। अधोमुख स्वानासन को डाउनवर्ड फेसिंग डाॅग पोज भी कहा जाता है।
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| adho mukha svanasana |
योगासन को करने की प्रक्रिया:-
इस योगासन को करने की प्रक्रिया बहुत आसान है और कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसने योगाभ्यास करना शुरू ही किया है, यह आसन कर सकता है। यह योगासन अयंत लाभदायक है और इसे प्रतिदिन के योगाभ्यास में अवश्य जोड़ना चाहिए।
अधोमुख स्वान आसन करने की प्रक्रिया :-
- अपने हाथों और पैरों के बल आ जाएं। शरीर को एक मे की स्थिति में ले आयें। आपकी पीठ मेज की ऊपरी हिस्से की तरह हेा और दोनों हाथ और पैर मेज के पैर की तरह।
- सांस छोड़ते हुए कमर उठाएं। अपने घुटने और कोहनी को मजबूती देते हुए सीधे करते हुए अपने शीरी को उल्टा V - आकार बनाएं ।
- हाथ कंधों के जितने दूरी पर हो। पैर की उंगलिया बिल्कुल सामने की तरफ हों।
- अपनी हथेलियों को जमीन पर दबाएं, कंधों के सहारे इसे मजबूती प्रदान करें। गले को तना हुआ रखते हुए कानों को बाहों से स्पर्श कराएं।
- लम्बी गहरी सांस लें, अधोमुख स्वान की अवस्था में बने रहें। अपनी नजरें नाभि पर बनाये रखें।
- सांस छोड़ते हुए घुटने को मोड़े और वापस मेज वाली स्थिति में आ जाऐं। विश्राम करें।
अधोमुख स्वान आसन को आसानी से करने के कुछ नुस्खे:-
- यह आसन करने से पहले अपने पैर की मांसपेशियों और हाथों को अच्छी तरह से तैयार कर लें।
- अधोमुख स्वान आसन करने से पहले धनुरासन या दण्डासन करें।
- यह आसन सूर्य नमस्कार के एक अंश के रूप में भी किया जा सकता है।
अधोमुख स्वान आसन से पहले किये जाने वाले आसन:-
धनुरासन
दण्डासन
अधोमुख स्वान आसन के बाद किये जाने वाले आसन:-
अर्धपिंचा मयूरासन
चतुरंग दण्डासन
उध्र्वमुख स्वान आसन
अधोमुख स्वान आसन के लाभ:-
- यह आसन शरीर को ऊर्जा देता है और आपको तरो-ताजा करता है।
- यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है।
- छाती की मांसपेसियों को मजबूती प्रदान करता है और फेफड़े की क्षमता को बढ़ाता है।
- यह पूरे शरीर को शक्ति प्रदान करता है। विशेषकर हाथ, कंधे और पैरों को।
- मांसपेशियों को सुद्रिढ़ करता है और मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ाता है।
- मन को शांति प्रदान करता है एवं सरदर्द, अनिंद्रा, थकान आदि में भी अत्यन्त लाभदायक है।

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