अंतर्ज्ञान क्या है ?
वह ज्ञान जो सबका आधार है, प्रकाश है, जानने की शक्ति, ज्ञान-मात्र को अंतर-ज्ञान कहते है।
अंतर्ज्ञान एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमें विश्लेणात्मक तर्क के बिना सीधे कुछ जानने की क्षमता देती है। जो हमारे दिमाग के सचेत और अचेत भागों के बीच की खाई को खत्म कर देती है। अंतर्ज्ञान का आभास हमें स्वयं अपने भीतर के ज्ञान से होता है या यह कहा जाय कि हमेशा रहता है। जो हमें विश्व के सम्पूर्ण ज्ञान के बारे में जानने की जिज्ञांसा हमारे भीतर उत्पंन करता है।
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हमसे जब भी कोई गलत काम होता है तो हमारे भीतर से एक आवाज आती है जो हमारा मार्ग दर्शन करती है और हमें सही रास्ता दिखती है यह आवाज हमारे अंतर्ज्ञान की होती है, जब कोई घटना हमारे साथ घटने वाली होती है तो कुछ क्षण पहले ही हमको उस घटना का आभास हो जाता है यही अंतर्ज्ञान है। मनुष्य को कौनसी चीज चिंता में डालती है, कौनसी चीज रूकावट डालती है, आपको क्या गुस्सा दिलाता है या आपको क्या दुःख देता है, इसे समझना मनुष्य को अपने बारे में साफ-सुथरा सही ज्ञान देता है। सच्चा अंतर्ज्ञान मनुष्य को अपने आत्मविश्वास से अत है। एक बार जब आप अपनी खुद की समझ और भावनाओं की संतुष्टि करना जान जाते है केवल तभी आप अपने दैनिक जीवन में अंतर्ज्ञान की बुद्धिमक्ता का उपयोग करते है। कुछ लोग अपने अंतर्ज्ञान की बुद्धिमक्ता पर भरोसा नहीं करते है और सोचते है कि उन्हें इन विचारों और भावनाओं से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
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मन में होने वाला वह स्वाभाविक ज्ञान जिससे कोई बात बिना सोचे अपने आप सामने आ जाती है। मन में रहने या होने वाला ज्ञान। मन में होने वाला या स्वाभाविक ज्ञान जो प्रकृति की ओर से जीवों को आत्मरक्षा,जीवन निर्वाह आदि के लिए प्राप्त होता है।

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