त्रिकोणासन :-
त्रिकोण - त्रिभुजाकार, आसन - आसन:
अन्य आसनों से भिन्न त्रिकोणासन में शरीर को साम्यावस्था में बनाए रखने के लिए आंखों को खुला रखा जाता है। त्रिकोणासन योग को करते समय शरीर का शेप त्रिकोण होता है, इसलिए इसे त्रिकोणासन कहते है। इस आसन में शरीर में अलग-अलग 3 कोण बनते है।
![]() |
| त्रिकोणासन-विधि-लाभ-Trikonasana-yoga-in-Hindi |
त्रिकोणासन करने की विधि:-
- सीधे खडे़ हो जाऐं। अपने पैरों के बीच सुविधाजनक 3 से 4 फिट की दूरी बना लें ।
- अपने दाहिने पंजे को 10 डिग्री तथा बाऐं पंजे को 15 डिग्री तक घुमाऐं।
- अपनी दाहिनी एडी के केंद्र को अपने बाऐं पैर से बन रहे धुमाव के केंद्र की सीध में लेकर आऐं।
- सुनिश्चित करें की आपके पंजे जमीन को दबा रहे हों और शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से हो।
- एक गहरी श्वास अन्दर की ओर लें, श्वास बाहर की ओर छोड़ते हुए अपने शरीर को दाहिने तरफ मोड़़ें, कुल्हों से नीचे की तरफ जाऐं, कमर को सीधा रखते हुए अपने बाऐं हाथ को ऊपर हवा में उठाऐं और दाहिने हाथ को नीचे जमीन की तरफ ले जाऐं। इस प्रकार अपने दोनों हाथों को एक सीध में रखें।
- अपने दाहिने हाथ को एडी या जमीन पर बाहर की तरफ रखें अथवा अपनी कमर को बिना मोड़े हुए जहां भी सम्भव हो रख सकते है। अपने बाऐं हाथ को ऊपर आसमान की ओर खींचे और कंधों की सीध में ले आऐं।
- अपने सिर की बीच में रखे या बाहिनी ओर मोड़ लें, आंखों की दृष्टि का बाहिनी हथेली की ओर केंद्रित करें।
- ध्यान रखें की आपका शरीर किनारे की तरफ से मुड़ा हुआ हो। शरीर आगे या पीछे की ओर झुका न हो। नितम्ब तथा वक्ष पूरी तरह से खुले रहें।
- शरीर में अधिकतम खिंचाव बनाए रखते हुए स्थिर रहें। गहरी सांसे लेते रहें। बाहर जाती हुई प्रत्येक सांस के साथ शरीर को विश्राम दें। अपने शरीर एवं सांस के साथ मनः स्थित रहें।
- जब भी सांस लें, ऊपर की ओर उठें, अपने हाथों को नीचे की तरफ लाऐं और पैरों को सीधा करें।
- यही प्रक्रिया अपनी दूसरी तरफ से भी करें।
त्रिकोणासन के लिए कुछ सुझााव:-
- इस आसन को करने से पूर्व आप इस बात का ध्यान रखे की आपने अच्छे से वार्म अप कर लिया हो।
- सामने की ओर झुकते समय आराम से धीरे-धीरे झुके ताकि आपका संतुलन बना रहे।
त्रिकोणासन से पूर्व किये जाने वाले कुछ आसन:-
- कटिचक्रासन
- कोणासन
- वृक्षासन
त्रिकोणासन के बाद किये जाने वाले आसन:-
त्रिकोणासन के लाभ:-
- यह आसन पैरों, घूटनों, एड़ियों, हाथों और वक्ष को मजबूत बनाता है।
- यह आसन नितम्बों, कूल्हों, जंघा की मांसपेशियों, कन्धों, वक्ष तथा रीढ़ की हड्डी में और ज्यादा खुलाव व खिंचाव उत्पन्न करता है और अधिक लचीला बनाता है। व इन सब अंगों में खुलापन बनाता है।
- यह आसन शारीरिक व मानसिक तारतम्यता को बढ़ता है।
- पाचन को बेहतर करने में सहायक है।
- पाचनक्रिया में सहायता करता है एवं उसे सक्रिय बनाता है।
- तनाव, चिंता पीठ के दर्द और सायटिका के कष्टों को दूर करता है।
त्रिकोणासन में सावधानियां:-
- यदि आपको माइग्रेन, डायरिया, निम्न या उच्च रक्तचाप, गर्दन या पीठ पर चोट लगी हो तो इस आसन को न करें जो उच्च रक्तचाप से पीड़ित है वह अपने हाथों को सिर के ऊपर ना उठाते हुए इस आसन को करें, अन्यथा उनका रक्तचाप और अधिक हो सकता है।
- जिन लोगों की पेट की सर्जरी हुई हो वो लोग इसे नहीं करें।
- इस आसन को करते समय अगर आपका सिरदर्द, चक्कर आना, पीठ दर्द जैसी समस्या हो तो तुरंत डाॅक्टर या योगा ट्रेनर की सलाह लें।

0 Comments