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वृक्षासन, विधि, लाभ | Vrikshasana (Tree Pose) yoga steps in hindi

वृक्षासन 

            यह आसन से वृक्ष की शांत एवं स्थिर अवस्था को दर्शाता है। वृक्षासन संस्कृत भाषा का शब्द है जहां वृक्ष का अर्थ पेड़ (Tree) और आसन का अर्थ बैठना या मुद्रा (Pose) है। जब इस मुद्रा का अभ्यास प्रभावरी ढंग से किया जाता है तो यह मुद्रा पेड़ की आकृति का दिखायी देता है, यही कारण है कि इसे वृक्षासन कहा जाता है। इस मुद्रा के दौरान शरीर को ठीक उसी प्रकार स्थिर रखना पड़ता है जैसे पेड़ जमीन पर स्थिर रहता है। वृक्षासन का अभ्यास करते समय हमारा पैर वृक्ष की जड़ों की तरह कार्य करता है। यह आसन स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है। अन्य योगासनों के विपरीत इस आसन में हमें अपने शरीर के संतुलन को बनाये रखने के लिए आंखे खुली रखनी पड़ती है।

वृक्षासन, विधि, लाभ  Vrikshasana-tree-Pose-yoga-steps-in-hindi
वृक्षासन, विधि, लाभ  Vrikshasana-tree-Pose-yoga-steps-in-hindi


वृक्षासन करने की विधिः-

  • हाथों को बगल में रखते हुए सीधे खड़े हो जाऐं।
  • दाहिने घुटने को मोड़ते हुए अपने दाहिने पंजे को बाएं जंघा पर रखें। आपके पैर का तलवा जंघा के ऊपर सीधा एवं ऊपरी हिस्से से सटा हुआ हो।
  • बाएं पैर को सीधा रखते हुए संतुलन बनाये रखें।
  • अच्छा संतुलन बनाने के बाद गहरी सांस अंदर लें, कृतज्ञता पूर्वक हाथों को सर के ऊपर ले जाऐं और नमस्कार की मुद्रा बनाऐं।
  • बिल्कुल सामने की तरफ देखें, सीधी नजर सही संतुलन बनाने में अत्यन्त सहायक हैं
  • रीढ की हड्डी सीधी रहे। आपका पूरा शरीर रबर बैंड की तरह तना हुआ हो। हर बार सांस छोड़ते हुए शरीर को ढीला छोड़ते जाएं और विश्राम करें, मुस्कुराते हुए शरीर और सांस के साथ रहें।
  • धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए हाथों को नीचे ले आयें। धीरे से दाहिने पैर को सीधा करें।
  • सीधे लम्बे खड़े हो जाए बिल्कुल पहले की तरह। अब बाएं तलवे को दाहिने जांघ पर रख कर आसन को दोहराऐं।


वृक्षासन के लाभः-

  • यह मस्तिष्क में स्थिरता और संतुलन लाता है।
  • एकाग्रता बढाने में सहायक है।
  • नसों की दर्द में अत्यन्त सहायक है।
  • इस आसन को करने के पश्चात आप ऊर्जा से परिपूर्ण महसूस करते है। यह आसन पैर, हाथों और बाजूओं की मांसपेशियों में खिचांव पैदा करता है। और आपको पुनः तरो-ताजा कर देता है।
  • यह आसन पैरों को मजबूती प्रदान करता है एवं संतुलन बनाने में सहायक है। जांघों के फैलाव में भी सहायक है।
  • वृक्षासन करने से आंख, कान का अंदरूनी हिस्सा और कंधे मजबूत होते है। यह आसन कान के लिए फायदेमंद तो होता ही साथ में साइटिका की बीमारी को भी दूर करने में मदद करता है।

वृक्षासन की सावधानियांः-

अगर आप माइग्रेन, अनिंद्रा, अल्प या उच्च रक्तचाप से पीड़ित है तो यह आसन न करें, उच्च रक्तचाप वाले इस आसन को हाथों को सर के ऊपर ले जाएं बिना कर सकते है। हाथों को ऊपर ले जाने से रक्तचाप बढ़ सकता है।

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