तितली आसन :-
इस मुद्रा को बद्धकोणासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें इसमें दोनों पावों के तलवों को जननांगों के पास, हाथों की मदद से जोर से पकड़ कर, एक विशेष कोण में साथ रखा जाता है। मुद्रा के दौरान पैरों की गति, तितली के हिलते पंखों की भाँति प्रतीत होने की वजह से इसे तितली आसन भी कहा जाता है। बैठ कर काम करते हुए मोची की तरह दिखने की वजह इस मुद्रा को मोची मुद्रा भी कहा जाता है।
![]() |
तितली आसन करने की प्रक्रिया :-
- पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं, रीढ़ की हड्डी सीधी रहे।
- घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं, पाँव के तलवे एक दूसरे को छूते हुए।
- दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें। सहारे के लिए अपने हाथों को पाँव के नीचे रख सकते हैं।
- एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें।
- लम्बी, गहरी सांस छोड़ते हुए घुटनों व जांघों को फर्श की ओर दबाएं।
- तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें। धीरे-धीरे गति बढ़ायें।
- सांस लेते रहें।
- जितना सम्भव हो उतनी तेजी से प्रक्रिया को करें। धीमा करते हुए रुकें, ठुड्डी उठी हुई, रीढ़ की हड्डी सीधी रहे।
- कोहनी से जांघों या घुटनों पर दबाव डालें जिससे घुटने व जांघ जमीन को हुए।
- जांघों के अंदरूनी हिस्से में खिंचाव महसूस करें और लम्बी गहरी सांस लेते रहें। मांसपेशियों को अधिक विश्राम दें।
- एक लम्बी गहरी सांस लें और धड़ को ऊपर लायें। सांस छोड़ते हुए धीरे से मुद्रा से बाहर आएं, पैरों को सामने की ओर फैलाएं, विश्राम करें।
कुंडलिनी योग, कुंडलिनी योग करने की विधि, कुंडलिनी योग के फायदे
- जांघों, कटि प्रदेश व घुटनो का अच्छा खिंचाव होने से श्रोणि व कूल्हों में लचीलापन बढ़ता है।
- लम्बे समय तक खड़े रहने व चलने की वजह से होने वाली थकान को मिटाता है।
- मासिक धर्म के दौरान होने वाली असुविधा व रजोनिवृति के लक्षणों से आराम।
- गर्भावस्था के दौरान लगातार करने से प्रसव में आसानी।
- आंतों के लिए लाभदायक है और मल त्याग में मदद करता है यह मूत्रजन्य प्रणाली के लिए भी फयदेमंद है
- तितली आसन करने से पैरों में खून का बहाव ठीक रहता है। गठिया व जोड़ों के दर्द में आसन को करने से काफी आराम मिलता है। इससे इम्युनिटी सिस्टम भी मजबूत होता है।
तितली आसन के अंतर्विरोध या सावधानी :-
- यदि आप कटि प्रदेश या घुटने की चोट से पीड़ित हैं तो सहारे के लिए जांघो के नीचे कंबल अवश्य रखें बिना कंबल के इस मुद्रा को बिलकुल न करें।
- सियाटिका के मरीज इस मुद्रा को बिलकुल न करें या कूल्हों के नीचे गद्दी रखें।
- यदि आपके पीठ के निचले हिस्से में तकलीफ है तो रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर यह मुद्रा करें।
- इस आसन को करते समय पैरों को ज्यादा जोर से न हिलाएं। जितने हो सके उतना ही करें। अभ्यास करते रहने से धीरे-धीरे आपके पैर अच्छे से मुड़ने लगेंगे।

0 Comments